गुग्गुल धूप की महिमा

न तं यक्ष्मा अरुन्धते नैनं शपथो अश्नुते। यं भेषजस्य गुल्गुलोः सुरभिर्गन्धो अश्नुते।। -अथर्व.१९.३८.१

जिस व्यक्ति को गुग्गुल औषध की सुगन्ध प्राप्त होती है, उसे न टी.बी. (ट्यूबरकुलोसिस) आदि रोग बाधित करता है, न ही शाप, मानस रोग आदि ।

घृतगुग्गुलुहोमे च सर्वोत्पातादिमर्द्दनम्। -अग्नि पुराण

घी और गुग्गुल के हवन से सभी प्रकार के उत्पातों का निवारण होता है।

औषधीय गुण-

त्रिदोषशामक, पुष्टिकारक, बलकारक, हृद्य, कण्ठकारक आदि।

रासायनिक संघटन- वाष्पशील तैल, कौमीफोरिक अम्ल, गुग्गुलस्टेराल, क्वर्सेटिन, प्लेनोलिक, ओलीक, स्टीयरिक,पॉमिटिक, सिटोस्टेरॉल, कैपेस्टेरॉल एवं फिनोलिक रेजिन होता है। वाष्पशील तेल में क्युमिनिक एल्डीहाईड, युजिनॉल, मेटाक्रिसोल, पाइनीन, लिमोनीन, डाईपेन्टीन तथा सेसक्यूटर्पीन होता है।

अपामार्ग

अथाऽऽपामार्गहोमं जुहोति, अपामार्गैव देवा दिक्षु नाष्ट्रा रक्षांस्यपामृज यदपामार्गहोमो भवति रक्षसामपहत्यै।। -शतपथ ब्राह्मण 5.2.4.14

अपामार्ग के होम से राक्षसों अथवा प्रदूषणों का निवारण होता है।